कालियावास जोहड़ की नयी तस्वीर

जब नागरिक, संसाधन और तकनीकी समझ साथ जुड़ जाये तो किसी भी बदहाल भौगोलिक परिस्थिति की सूरत बदली जा सकती है। ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला गुरुग्राम में स्थित गांव कालियावास में, जहाँ कालियावास पंचायत व ग्रामीणों के सहयोग से, गुरुजल, CSR भागीदार Fiserv और United Way of Mumbai तथा EFI की परस्पर सहभागिता ने शिव मंदिर जोहड़ को एक नया रूप दिया है।

एम्स कैंसर संस्थान, झज्जर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह तालाब हमलावर खरपतवार, वर्षो से जमी गाद तथा उबड़ खाबड़ तालाब तल की समस्याओ से जूझ रहा था। गुरुजल व Fiserv के सहयोग से EFI ने सर्वप्रथम खरपतवार की जड़ से खुदाई की तथा तालाब के गंदे पानी को पास से गुजर रहे नाले में खाली किया। तालाब से पानी को खाली करने में काफी दिक्क़ते सामने आई, जिसमे गाद के फसने से पम्पिंग में रूकावट, लगातार गांव से आते सीवेज तथा पास से बहती नहर की वजह से उच्च भूजल स्तर से उत्पन्न जल स्त्रावण प्रमुख थी।

पंचायत के आग्रह पर न सिर्फ ग्रामीणों ने प्रतिदिन जल का दोहन व तालाब में निष्कासन को कम किया बल्कि तालाब खाली करने में आवश्यक श्रमशक्ति का भी योगदान दिया।

तालाब के खाली होने के पश्चात तालाब तल को धूप में सूखने के लिए छोड़ा गया ताकि तल मशीन के काम करने योग्य हो सके तथा बंध बनाने में आवश्यक सूखी गाद तैयार हो सके। तत्पश्चात तालाब के चारो तरफ एकल व दोहरे सीढ़ीनुमा बँधो का निर्माण किया गया। तालाब की पूर्वी सीमा पर स्थित खाली जमीन को भी काटकर तथा तल से गाद की खुदाई करके तालाब की भंडारण क्षमता को लगभग दुगुना किया गया। साथ ही साथ गांव से आ रही खुली नाली के स्थान पर उचित व्यास के सीमेंटेड पाइप्स लगाकर चैनल को नियमित किया गया तथा सफाई- चैम्बर्स का निर्माण करके ठोस कचरा तालाब में गिरने से रोकने के लिए ग्रिट चैम्बर का भी निर्माण किया गया। खुली नाली से उत्पन्न जल जनित बीमारियों को रोकने में भी यह तंत्र सहायक सिद्ध होगा।

तालाब के पुनरुद्धार के अंतिम चरण में नागरिको व पशुओ की सुरक्षा तथा कचरे को तालाब में गिरने से रोकने के लिए चारो तरफ लगभग 250 मीटर लम्बी बाड़ेबंदी का निर्माण किया गया। आज तालाब पर भिन्न भिन्न पक्षी देखे जा सकते है तथा बँधो पर उगी वनस्पति, मृदा अपरदन को रोकने में सहायक सिद्ध हो रही है। मानसून के आगमन के साथ ही तालाब के चारो और वृक्षारोपण तथा तालाब के पानी से हानिकारक तत्व सोखने वाली प्रजाति के जलीय पौधों का रोपण भी प्रस्तावित है।

इस बहुआयामी भागीदारी से संपन्न पुनरुद्धार के बाद यह तालाब अपने नए जीवंत रूप में सामने है तथा लगभग 500 घरो से आते सीवेज का भंडारण व प्राकृतिक रूप से शुद्धिकरण करने के लिए एकदम तैयार है। EFI एक बार फिर से गुरुजल तथा Fiserv के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता है।

Check out all that happened during this restoration!

Here’s what the local residents had to say about the restoration –

We thank all those who supported our efforts!

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