पुणे की राजीव गाँधी जूलॉजिकल पार्क झील जो की कात्रज झील के नाम से भी जानी जाती है, का पुनरुद्धार कार्य संपन्न करके EFI ने पुणे के उत्तरी छोर पर इंद्रायणी तथा भामा नदी के बीच स्थित पझार तलाव पर काम शुरू किया। यह जलाशय पुणे के खेड़ तालुका में स्थित है जो कि चारो ओर से स्थानीय पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
पझार तलाव वर्षो पुरानी एक संरचना का हिस्सा है जिसके तहत भामा नदी जो कि भीमा नदी की सहायक नदी है, से नहर खोदकर पानी को दक्षिण दिशा में स्थित पठारी क्षेत्रो तक लाया गया और फिर इस प्रकार के जलाशयों का निर्माण करके आबादी की जल जरूरतों को पूरा करने में किया जाता था। नीचे दिए गए मानचित्र में आज भी इस व्यवस्था को भली भांति देखा जा सकता है जिसमे तीन तालाब नहर द्वारा भामा नदी का पानी गाँवो तक पहुंचा रहे है , मानचित्र में स्थित पहला जलाशय ही पझार तलाव है।

पठारी तथा पहाड़ियों से घिरे हुए होने के कारण वर्षो से मृदा अपरदन तथा वर्षा जल के कटाव के चलते तलाव के काफी मात्रा में तलछट जमा हो गया था , साथ ही जलाशय के बंध भी कमजोर व अनियमित थे। तालाब के चारो ओर खरपतवार के कारण स्थानीय वनस्पति के विकास में भी बाधा पहुँच रही थी।
EFI ने सर्वप्रथम तलाव के चारो ओर से खरपतवार को साफ किया ताकि मशीन का सुचारु रूप से जलाशय के चारो ओर आवागमन हो सके।
तत्पश्चात जमा हुए तलछट को निकल कर किनारे पर सूखने के लिए छोड़ा गया और फिर बँधो को मजबूत करने में इसका इस्तेमाल किया गया। चूंकि तालाब कई प्रजातियों के पक्षियों को आवास प्रदान करता है, अतः अतिरिक्त गाद का उपयोग स्वतंत्र द्वीप बनाने में किया गया जिसका उपयोग उभयचर तथा पक्षी प्रजनन के लिए कर सकेंगे।
पुनरुद्धार के अंतिम चरण में पानी के आगमन के रास्तो को साफ़ तथा नियमित किया गया ताकि वर्षा ऋतु में पानी बिना रुकावट के तालाब में प्रवेश कर सके। तलछट जमाव को तालाब के मुख्या भराव क्षेत्र में जाने से रोकने के लिए छोटे प्राथमिक भराव क्षेत्रो का भी निर्माण किया गया।
पझार तलाव लगभग 8000 की आबादी वाले गांव की जलापूर्ति का स्त्रोत है तथा क्षेत्र के कई कुओ व बावड़ियों के भूजल स्तर में अपना सीधे तौर पर योगदान देता है। साथ ही क्षेत्र में होने वाली फसलों जैसे गन्ना, आम, व स्थानीय सब्जियों के उत्पादन में भी अपनी भूमिका निभाता है।
आशा है कि आम नागरिको, किसानो, पक्षियों तथा वनस्पति के चहुमुंखी विकास में भागेदारी निभाने वाला पझार तालाब पुनरुद्धार के बाद आने वाले वर्षो में सुदृढ़ रूप से अपनी भूमिका निभाकर क्षेत्र की जैव विविधता में चार चाँद लगाता रहेगा।






