गुरुग्राम से दस किलोमीटर तथा नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 25 किलोमीटर, फार्रुखनगर ब्लॉक में स्थित है गाँव चंदू । गुरुग्राम और फार्रुखनगर को जोड़ने वाले मार्ग के उत्तरी छोर पर तथा खेडक़ी माजरा के समीप स्थित चंदू गाँव में इस तालाब का पुनरुत्थान कार्य दिसंबर में शुरू हुआ। राजधानी के घने कोहरे और कंपकंपाती ठण्ड के बीच, सर्वप्रथम तालाब के किनारे पर पड़े कचरे को इकठ्ठा करके पंचायत के सहयोग से उचित स्थान पर पहुँचाया गया ।


अब तालाब के प्रदूषित पानी का निष्कासन और गाद का उन्मूलन कार्य प्रगति पर है जो संक्रांति पर्व से पहले पूर्ण किया जाना संभावित है ।


चंदू गाँव का यह तालाब अपनी भौगोलिक स्थिति की दृष्टि से काफी मायने रखता है। तालाब से मात्र 2 किमी दूर पश्चिम में सुल्तानपुर पक्षी उद्यान है जबकि मात्र 4 किमी दूर उत्तर में नजफगढ़ पक्षी उद्यान व साहिबी नदी मौजूद है । क्षेत्र के कृषि की रीढ़ कहे जाने वाली GWS नहर भी तालाब के उत्तर में बहती है । इन सभी अवयवों के अलावा, चंदू तालाब स्थानीय जल प्रवाह परिदृश्य से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तालाब के पश्चिमी सीमा पर ही इस क्षेत्र की जल आपूर्ति करने वाली ट्यूबवेल तथा पंप हाउस स्थित है । चंदू तालाब की बिगड़ती सेहत तथा प्रदूषित जल का दुष्प्रभाव सीधे रूप से इस ट्यूबवेल पर पड़ता है । यदि समय रहते इस तालाब पर ध्यान नहीं दिया जाता तो इसका प्रदूषित पानी सीपेज द्वारा भूजल में मिलकर यहाँ के रहवासियो के घरो तक पहुँच सकता था जो और लोगो की सेहत पर भयंकर दुष्परिणाम संभव थे।
तालाब की साफ़ सफाई के साथ इसकी गाद का उन्मूलन, तटबंधों का निर्माण इस तालाब की आयतन क्षमता को भी बढ़ाएगा, जिससे यह तालाब अधिक से अधिक वर्षा जल का संग्रहण करके ट्यूबवेल के भूजल स्तर में सुधार करेगा।
तेजी से विकसित होते राजधानी के निकट इस क्षेत्र में चंदू तालाब का पुनरुत्थान, एक तीर से कई निशाने वाली कहावत को चरितार्थ करता है । क्योंकि इस परियोजना के पूर्ण होने पर यह तालाब क्षेत्र के पक्षिओ तथा स्थानीय जैव विविधता के साथ साथ प्रत्यक्ष रूप से यहां रहने वाले नागरिको व उनकी जल आपूर्ति पर सकारात्मक परिणाम लाने में संभव होगा ।



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